सिरसा जिले के गांव देसूमकाना निवासी गुरप्रीत की नशा तस्करी के आरोप में हिरासत लेने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मामले की सूचना मिलने के बाद मृतक के परिजनों ने नारकोटिक्स सेल प्रभारी समेत अन्य के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया।
मृतक के परिजन पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े है और निजी अस्पताल के बाहर रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया।
मृतक के परिजन नछतर सिंह ने बताया कि बीते दिन वह अपने परिवार के साथ घर में ही थे। 28 वर्षीय गुरप्रीत सिंह खेत से ट्रैक्टर लेकर घर पर पहुंचा। इसी दौरान नारकोटिक्स सेल के प्रभारी दाताराम व चार पांच अन्य पुलिस कर्मचारियों ने उसे काबू कर लिया और गाड़ी में डालकर अपने साथ ले गए। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस कर्मचारियों से मांगी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया।
देर रात तक वह गुरप्रीत की जानकारी जुटाने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते रहे लेकिन उनकी कोई भी सुनवाई नहीं हुई। रात करीब साढ़े 11 बजे उनके पास आढ़ती का फोन आया। उसने बताया कि उनके बेटे गुरप्रीत की मौत हो गई है और वह निजी अस्पताल में है। सूचना मिलते ही वह अस्पताल पहुंचे और जानकारी जुटाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस झूठे मामले का दबाव गुरप्रीत पर बना रही थी। बांधकर मारपीट भी की गई। मारपीट के कारण गुरप्रीत की मौत हुई है। परिजनों ने अस्पताल के बाहर रोष प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार मृतक गुरप्रीत पर पहले ही 10 से 12 नशा तस्करी के अलग-अलग थानों में मामले दर्ज है। पांच दिन पहले ही वह जेल से जमानत पर बाहर आया था।
पुलिस अधिकारी बोले- नशे का आदी था युवक, ओवरडोज ली थी
वहीं नारकोटिक्स सेल के प्रभारी दाताराम का कहना है कि नशा तस्करी मामले में आरोपी को काबू किया गया था। आरोपी नशे की सप्लाई करने के साथ नशा का सेवन भी करता था। उसने पहले ही ओवरडोज ले रखी थी और उसके कारण उसकी मौत हुई है। पुलिस ने कोई भी मारपीट नहीं की है। उसे अस्पताल में भी दाखिल करवाया गया था लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई।
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