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मैंगलुरु में साइबर ठगी के आरोप में दो गिरफ्तार, झारखंड के जामताड़ा से जुड़े तार

 कर्नाटक के मैंगलुरु में साइबर अपराध में सहयोग देने के आरोप में बेलगावी के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. ये आरोपी जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी करने वाले गिरोहों की मदद कर रहे थे.

पुलिस ने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अविनाश सुतार (28) और अनुप कारेकर (42) के रूप में हुई है.


पुलिस के मुताबिक, ये दोनों आरोपी उत्तर भारत के साइबर अपराधियों से टेलीग्राम एप के जरिए जुड़े हुए थे और उन्हें कमीशन के बदले बैंक खाते उपलब्ध कराते थे.


घटना का खुलासा कैसे हुआ?


दरअसल, यह मामला तब सामने आया जब पुत्तूर के एक निवासी द्वारा साइबर, आर्थिक और नशा विरोधी (CEN) पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई. इस जांच के दौरान पुलिस को इस जालसाजी का बड़ा नेटवर्क सामने मिला. दक्षिण कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक यतीश एन ने बताया कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को थोड़े पैसों का लालच देकर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उनके खाते की जानकारी ले लेते थे. इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधी अमीर व्यक्तियों से पैसा उगाही करने के लिए करते थे.


40 लाख रुपये की ठगी का मामला


साइबर ठग वीडियो कॉल पर झूठे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाकर लोगों को धमकाते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे. पुलिस के अनुसार, पुत्तूर के एक व्यक्ति राधाकृष्ण नायक को इसी प्रकार से धमकी दी गई और उन्होंने डरकर आरटीजीएस के जरिए 40 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए लेकिन बाद में उन्हें ठगी का शक हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया.


गिरफ्तारी और आगे की जांच


पुलिस जांच में यह पैसा बेलगावी के एक बैंक खाते में ट्रांसफर हुआ था, जिसके बाद अविनाश सुतार और अनुप कारेकर को गिरफ्तार किया गया. पुलिस का कहना है कि इस ठगी के तार झारखंड के जामताड़ा से जुड़े हुए हैं, जो भारत में साइबर अपराध का बड़ा केंद्र माना जाता है. इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया है कि कई लोगों ने पैसों के बदले अपने बैंक खाते इन साइबर अपराधियों को बेच दिए थे. फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है और जांच जारी है.

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