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कल का दिन होगा अहम, सदन में वोट के बदले नोट मामले पर SC की 7 जजों की संविधान पीठ सुनाएगी फैसला

ल देश के लिए एक बड़ा दिन है. कल सुप्रीम कोर्ट वोट के लिए रिश्वत मामले में अपना फैसला सुनाएगी. सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ पीवी नरसिम्हा राव मामले में अपने 1998 के फैसले की दोबारा जांच से संबंधित मुद्दे पर फैसला सुनाएगी.

सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि सदन में वोट के लिए रिश्वत में शामिल सांसदों/विधायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से छूट दी जाए या नहीं. इस मामले में CJI डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जेबी पारदीवाला, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच फैसला सुनाएगी. पिछले साल अक्टूबर में सीजेआई की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था.

20 सितंबर को आया था बड़ा फैसला

इससे पहले, पिछले साल 20 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया था. सदन में वोट के लिए रिश्वत में शामिल सांसदों/विधायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से छूट पर फिर से विचार करने को सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया था. पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस मुद्दे से निपटने के लिए मामले को सात न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया था और कहा था कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसका राजनीति की नैतिकता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है.

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने कहा था कि अनुच्छेद 105(2) और अनुच्छेद 194(2) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्य परिणामों के डर के बिना स्वतंत्रता के माहौल में कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम हों. 7 जजों की बेंच जेएमएम सांसद रिश्वत मामले में फैसले पर पुनर्विचार करेगी, जिसमें सांसदों ने 1993 में नरसिम्हा राव सरकार के समर्थन में वोट करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत ली थी. कोर्ट यह तय करेगा कि अगर सांसद या विधायक सदन में मतदान के लिए रिश्वत लेते हैं तो क्या तब भी उस पर मुकदमा नहीं चलेगा? 1998 का नरसिम्हा राव फैसला सांसदों को मुकदमे से छूट देता है.

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