
सुप्रीम कोर्ट ने नशीला पदार्थ जब्ती मामले और आपराधिक इतिहास वाले आरोपियों को नियमित जमानत देने को लेकर अहम टिप्पणी की है। सोमवार को एक मामले में सुनवाई करते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अदालतों को उन मामलों में आरोपी को नियमित जमानत देने पर विचार करना चाहिए, जिसमें भारी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए हों, खासकर जब आरोपी का आपराधिक इतिहास हो।
सर्वोच्च अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को गलत करार देते हुए रद्द कर दिया, जिसमें 232.5 किलोग्राम गांजा जब्ती से संबंधित एक मामले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत दी गई थी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट इस बात पर विचार करने में विफल रहा कि आरोपी का आपराधिक इतिहास है और उसे पहले से ही नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दो मामलों में दोषी ठहराया गया था।
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