सोमवार को एसजीपीजीआई में आग लगने से तीन लोगों की मौत हुई थी, हालांकि कि प्रशासन का कहना है कि आग के चलते दो लोगों की जान गई है। अस्पताल में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है।
फायर सर्टिफिकेट जरूरी
सभी अस्पतालों को फायर एनओसी लेना जरूरी होता है। हालांकि राजधानी के करीब 72 प्रतिशत अस्पताल इस मानक पर खरे नहीं उतरते हैं। इसमें सरकारी और प्राइवेट अस्पताल शामिल हैं।
क्यों नहीं हो रही कार्यवाही?
आकड़ों के अनुसार, यहां 500 से अधिक अस्पताल फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेने के लिए आवेदन कर चुके हैं। 200 के करीब अस्पतालों को सर्टिफिकेट दे दिया गया है। बाकी बिना एनओसी के ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इन अस्पतालों पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा है।
सीएमओ देते हैं लाइसेंस
फायर ब्रिगेड अधिकारियों के मुताबिक, अस्पतालों को लाइसेंस चीफ मेडिकल ऑफिसर देते हैं, ऐसे में उन्हें देखना होगा कि जिन हॉस्पिटल के पास फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट न हो उन्हें लाइसेंस दिया ही न जाए। इसको लेकर पिछले दिनों सीएमओ को लेटर भेजा गया था, लेकिन जवाब नहीं आया है। ऐसे में फायर ब्रिगेड एक बार फिर सीएमओ को लेटर भेजने की तैयारी कर रहा है।
कई बार भेजा नोटिस
किसी भी बिल्डिंग में फायर मानक न मिलने पर फायर बिग्रेड की तरफ से नोटिस भेजा जाता है। जिसमें तीस दिन का समय दिया जाता है, लेकिन अगर जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ सीआरपीसी 133 के तहत कार्यवाही की जाती है। ऐसे कई हॉस्पिटल हैं, जिन्हें कई-कई बार नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।
फायर मानकों की आए दिन चेकिंग की जाती है। पिछले दिनों अस्पतालों समेत कई जगहों का मुआयना किया गया। खामियां मिलने पर अस्पताल संचालक को नोटिस देकर तीस दिन में जवाब मांगा जाता है।






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