एम.फिल से प्राप्त छात्रवृत्ति के पैसों से डांग जिले के अनाथ और गरीब बच्चों को गांव-गांव ढूंढकर शिक्षा का संस्कार सींचने वाले यह शिक्षक जीव अपनी पत्नी श्रीमती पार्वतीबेन जो कि एम.ए./बी.एड तक की शैक्षणिक डिग्री प्राप्त की है। उनके साथ मिलकर सौ से अधिक बालदेवताओं को शिक्षा के इस मंदिर में बैठाकर मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं। प्रबंध निदेशक श्री महेंद्रभाई गाइन, जो पिछले छह वर्षों से अपनी कृषि आय से इस शैक्षिक परिसर को चला रहे हैं, यह दंपति बच्चों के लिए अध्ययन कक्ष और छात्रावास के अलावा एक कैंटीन सहित आधुनिक सुविधाओं के साथ शिक्षा का रथ चला रहा है। आइए 'शिक्षक दिवस' के अवसर पर इस शिक्षक दंपत्ति को सलाम करें जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंदों को शिक्षा के गुण प्रदान करने के एकमात्र उद्देश्य से अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।







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