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सच्चाईयाँ न्यूज:गुजरात-जिला हनुमान मंदिर से पुराने झंडे हटाकर नए झंडे लगाए गए

जिला हनुमान मंदिर से पुराने झंडे हटाकर नए झंडे लगाए गए। इसके बाद भव्य ध्वज शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा के आहवा और कयी ग्रामीण इलाकों में शोभा यात्रा निकाली गयी थी डांग बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर गायत्री यज्ञ एवं शंख ध्वनि प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। हनुमान जयंती पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आहवा में स्थित हनुमान मंदिर में एकत्र हुए। शोभा यात्रा निकाली गई। आहवा में ध्वज को कराकर के मुख्य मार्गों से होते हुए ध्वज शोभा यात्रा पुन: हनुमान मंदिर पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने हनुमान ध्वजा में श्रीफल बांध कर सुफल की कामना की। आहवा डांग में स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाई गई। भक्तों ने सुंदरकांड का पाठ कर भजन-कीर्तन भी किए। साथ ही श्रद्धालु भक्तों को भोजन महा प्रसाद लाभ करवाया और हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर लोगो ने डी.जे पर हनुमानजी और श्री राम जी के गीत पर धूम धाम से नाचते हूँए आहवा और कयी इलाकों में इस तरह हनुमान जन्मोत्सव को मनाया गया। हनुमान जन्मोत्सव साल में दो बार हनुमान जयंती मनाई जाती है- एक चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को और दूसरी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि. हनुमान जयंती का दिन हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. माना जाता है कि हनुमान जयंती अगर सप्ताह में मंगलवार या फिर शनिवार के दिन पड़ती है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। हनुमान जयंती का दिन राम भक्तों और हनुमान भक्तों के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है. बजरंगबली के भक्त इस दिन को बेहद ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाते हैं. एक बार भगवान राम की लंबी उम्र की कामना करते हुए हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था. कहा जाता है तब से ही भगवान हनुमान को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत हुई. कुछ लोग हनुमान जयंती को ही हनुमान जन्मोत्सव कहते हैं. आइए जानते हैं कि हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव में क्या अंतर है. क्या इन दोनों को एक कहना ठीक होगा. जानते हैं इसके पीछे का कारण. कुछ लोग हनुमान जन्मोत्सव कहते हैं और कुछ लोग हनुमान जयंती कहते हैं. हिन्दू पंचांग में कही पर हनुमान जयंती लिखा होता है और कुछ जगहों पर हनुमान जन्मोत्सव भी लिखा होता है. लेकिन मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी के जन्मदिन को जयंती नहीं बल्कि जन्मोत्सव कहा जाना उचित होगा. दरअसल, जयंती और जन्मोत्सव दोनों का तात्पर्य जन्मदिन से होता है. लेकिन, जयंती का प्रयोग उनके लिए किया जाता है, जो जीवित है ही नहीं. लेकिन यहां बात भगवान हनुमान करी जाए तो इन्हें कलयुग का अमर देवता माना गया है। इसी के साथ डांग जिले में इस हनुमान जन्मोत्सव को श्रधालुओंने धूम धाम से मनाया।

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